कार्यक्रम

आलोक श्रीवास्तव को मिला प्रथम परसाई मंच सृजन सम्मान

वो सूरत जानी पहचानी नहीं है, मगर लगती भी बेगानी नहीं है।
तेरी चौखट की कीलों से जो उलझी, तभी से ये चूनर धानी  नही है।
प्रवीण पाण्डेय / देस परदेस
मुंबई  महानगर की चिरपरिचित साहित्यिक संस्था ‘परसाई मंच’ द्वारा गणतंत्र दिवस पर मलाड में “अहा जिंदगी” के संपादक आलोक श्रीवास्तव को प्रथम परसाई मंच सृजन सम्मान से सम्मानित करने के कार्यक्रम में सम्मान मूर्ति का काव्यपाठ भी हुआ.  प्रसिद्ध गायिका शोमा घोष की ठुमरी हुई.  मेजबान अलका  अग्रवाल सिगतिया की आत्मीयता रही साथ ही शहर के प्रसिद्ध रचनाकारों   द्वारा विविध रचनाओं का पाठ भी किया गया ।

समारोह के अध्यक्ष संपादक अभिलाष अवस्थी ने सम्मानमूर्ति को ऐसा संघर्षशील कवि पत्रकार कहा जिन्होंने कभी गलत बातों के साथ समझौता नहीं किया। उनकी यह पंक्तियां काफी सराही गई -वो सूरत जानी पहचानी नहीं है ,मगर लगती भी बेगानी नहीं है। तेरी चौखट की कीलों से जो उलझी, तभी से ये चूनर धानी  नही है। सुर में कविता -अमृत व संगीत की प्रतीक शोभा घोष ने ठुमरी के साथ कविता की तान से श्रोताओं को चमत्कृत कर दिया.  मां ने चलाया था ऊंगली पकड़कर, पिता ने दिखाया था रास्ता आगे बढ़कर.

Alko Shrivastav 1st parsai manch award alka agrawalपरसाई  मंच की निदेशक अलका अग्रवाल सिगतिया द्वारा अतिथि सत्कार के बाद गजलकार हस्तीमल हस्ती, व्यंग्यकार यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय, मुंबई मित्र -वृत्त मित्र के  समूह संपादक अभिजीत राणे, अभिलाष अवस्थी, शोमा घोष ने आलोक श्रीवास्तव को प्रथम परसाई मंच सृजन सम्मान स्वरुप शॉल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह व अभिनन्दन पत्र भेंट किया। दबंग दुनिया के शहर संपादक एस.पी यादव ने सम्मानमूर्ति का विशेष सम्मान किया।

देवमणि पाण्डेय के संचालन में हुए रचना पाठ में बालिका श्रेया राम रामचंदन की प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय रही। राजीव रोहित ने पेशावर के बच्चों के नाम ,प्रमिला शर्मा ने ‘ये मेरे देश ‘गुलजार हुसैन ने ‘रस्सी से केवल फांसी के फंदे ही नहीं बनते ,रचना भंडारी ने रिश्ते ,अमर त्रिपाठी ने मैं पतंग हूं , डॉ.विनोद के. भल्ला  ने मां मुझे जीना है, अंजू सराफ ने निर्वासित द्रौपदी हूं तथा अलका अग्रवाल सिगतिया ने प्रभावशाली व्यंग्यपाठ किया.  साहित्य पृष्ठ प्रभारी लक्ष्मी यादव, डॉ.संतोष श्रीवास्तव, सिब्बल बैजी ,कमलेश पाण्डेय तरुण ,संजय भिसे, डॉ. वनमाली चतुर्वेदी, संजय अमान, रास बिहारी पाण्डेय, सुमिता केशवा के काव्यपाठ के बाद हेमा चंदानी ने भी रचनाएँ पेश की.

हस्तीमल हस्ती  की अनुभूति रही -लोग मिलते ही नहीं राह दिखाने  वाले ,हर जगह जाल है जाल बिछाने वाले। प्रेम जनमेजय ने अपने वक्तव्य में कहा कि हरि शंकर परसाई  जी मेरे लिए व्यंग की पाठशाला रहे हैं। परसाई मंच ने उनके नाम पर सृजन सम्मान का प्रारम्भ कर स्तुत्य कार्य किया है। आलोक श्रीवास्तव ने सृजन की निरन्तरता बनाए रखी  है, उनका चयन करने हेतु अलका अग्रवाल का आभार।

समारोह अध्यक्ष अभिलाष अवस्थी ने परसाई मंच की सराहना भी की। कार्यक्रम में पत्रकार धर्मेन्द्र पाण्डेय ,जीतेन्द्र शर्मा ,आशीर्वाद के निदेशक डॉ.उमाकांत वाजपेयी ,कला संस्कृति के संपादक डॉ.विरेन्द्र मिश्र ,प्रो संतोष तिवारी, पत्रकार किशोर मासूम, अफज़ल व नुसरत खत्री ,सुमित्रा अग्रवाल ,अनुपम मेश्राम ,रोहित गुप्ता ,प्रतीक्षा रावल ,आदि उपस्थित थे।

सम्मान मूर्ति ने अपनी बुद्ध सुजाता, यह युग, तस्लीमा, वह आवाज, आदि कविताओं का पाठ किया। शोमा घोष की खनकती -पवित्र आवाज में परसाई मंच के थीम सांग ‘हम उजाला जगमगाना चाहते हैं ‘अब अक्षरों को मिटाना चाहते है ‘के साथ परसाई मंच की निदेशक अलका अग्रवाल सिगतिया के आभार प्रदर्शन से कार्यक्रम समाप्त हुआ। वरिष्ठ स्तंभकार  राजेश विक्रांत के सफल संयोजन व सहयोग के प्रति उनका विशेष आभार था। जिन्होंने बहुत ही सुन्दर सम्मान पत्र लिखा।
(Friday, 30 January 2015, https://www.facebook.com/despardeslive से साभार)
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काव्य गोष्ठी
कल मुंबई के लेखिका अलका अग्रवाल जी के घर में काव्यगोष्ठी का आयोजन की गयी थी। दिल्ली दूरदर्शन में कार्यनिरत लेखक अमरनाथ अमर जी ,पंजाब यूनिवर्सिAlka Agrawal with Lata Tejeshwar02Alka Agrawal with Lata Tejeshwar01टी हिंदी विभाग के एच ओ डी हरदीप जी, मुम्बई के नवभारत टाइम्स के पत्रकर, लेखक और गीतकार कैलाश जी, आश्रय संस्था के संस्थापक वाजपेयी जी, गजलकार हस्तीमल हस्ती जी, अमरनाथ त्रिपाठी जी कवयित्री और पत्रकार लेखक करुणा अगरवाल जी और नजमा जी कवयित्रियाँ चित्रा देसाई जी, सुषमा सेन गुप्ता जी सरोज लोड़ाय और मैं लता तेजश्वर कार्यक्रम में शामिल थे।

हम सब ने अपनी कवितायेँ प्रस्तुत किये और अमरनाथ जी दूर दर्शन में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजन के बारे में बताया।

गोष्टी को घरेलु माहोल देने के वजह से बहुत मजा आया। खूब साहित्यिक विचारों का आदान प्रदान किया गया।

अलका अग्रवाल जी के घर काव्यगोष्ठी में अमर जी को मेरी उपन्यास ‘हवेली’ को भेंट करी और संचालक अलका अग्रवाल जी को मेरी काव्य संग्रह “मैं साक्षी यह धरती की” को भेंट करती हुई मैं, दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ ‘अमर’ व अन्य साहित्यकारों के साथ कुछ अनमोल लम्हें।
(लता तेजेश्वर के फेसबुक खाते से साभार, 13 अक्तूबर 2015 को प्रकाशित)
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वर्षा रावल जी एक बहुआयामी व्यक्तित्व वाली महिला है
संस्मरण/ व्यंग्य • साहित्य
by Shahnaz Queen
16 मार्च को परसाईं मंच के तत्वाधान में अल्का अग्रवाल सिग्तिया के आवास पर रायपुर से आई अतिथि रचनाकार वर्षाजी रावल के सम्मान में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। वर्षाजी रावल एक बहुआयामी व्यक्तित्व वाली महिला है जो आल इण्डिया रेडियो में उद्गोशिका होने के साथ साथ कविता,कहानी,व्यंग्य की रचना कर रही हैं। वर्षा जी के गायक पुत्र वैभव और चित्रकार पुत्री पल्लवी भी उपस्थिति थे। इस गोष्ठी में मुम्बई साहित्य जगत के कई हस्ताक्षरों की उपस्थिति विशिष्ट रही।Varsha Raval wityh Alka Agrawal

सभी के कविता,गज़ल और व्यंग्य पाठ ने एक अद्भुत समां बाँध दिया।एक तरफ बहुत ही तीखे व्यंग्य सुनाए गए तो दूसरी तरफ गीत,गज़ल, कविता का पाठन हुआ। कवियों को एक सूत्र में पिरोकर वागीशजी ने इस गोष्ठी का बहुत ही सफल संचालन किया।

एक ओर थी बुजुर्गों के अकेलेपन को कहती अर्चना जौहरी की कविता तो वहीँ दूसरी ओर कविता गुप्ता ने आज की फैलती हुई हिंसा पर अपनी कविता से प्रश्न उठाया।
करुणा अग्रवाल ने नैनों पर एक सुन्दर गीत की प्रस्तुति दी तो सीमा गुप्ता ने अपनी कविता द्वारा अपनी पहचान करवाई।

कहीं नारी शक्ति का वर्णन था ,तो कहीं लड़कियों के हालातों को बयां करती हेमाजी की दिल को छू लने वाली ग़ज़ल। अमर त्रिपाठी ने पतंग की व्यथा और 26-11 की घटना को अपने शब्द दिए तो हमारे अध्यक्ष महोदय कैलाश सेंदर ने अबकी बार कविता और व्यंग्य से हटकर सुन्दर गीत सुनाया।

अल्काजी ने राजनैतिक मसलों को कृष्ण- मीरा के वार्तालाप द्वारा बहुत ही व्यंगात्मक शैली में प्रस्तुत किया तो  तरुण अग्रवाल ने कॉर्पोरेट द्वारा मिट्टी को भी अपना बता लेने पर व्यंग्य किया।

चंद्रपाल जी ने किसानों के हालात बयां करती कविता सुनाई तो इमरोज़ आलम ने टोपी धारी नेताओं को अपने व्यंग्य का निशाना बनाया।

गोष्ठी में गीतकार विश्वजीत ने अपनी आवाज़ का समाँ बांधा और वैभव ने मोहम्मद रफ़ी के शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय गायन से सबका मन मोह लिया।
(http://aakharhindi.com/varsha-rawal/से साभार, मार्च 2015 में प्रकाशित)
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