राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन [वाजाल] व भवन्स कल्चरल सेंटर अँधेरी के संयुक्त तत्वावधान में ठसाठस भरे भवन में दर्शक साक्षी बने उस अनूठे आयोजन के, जहाँ भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा जी की पेशी हुई, उन पर इलज़ाम लगाये गए, लेकिन यहाँ माहौल बहुत ही खुशनुमा था, अपनेपन से भरा था, दर्शक उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं से रूबरू हो पाए, कई बार हॉल ठहाकों व तालियों से गूंजा। अनूपजी की विशेषता है कि शीर्ष स्थान पर पहुँच कर भी आज भी धरती से जुड़े हैं। उनका हास्य बोध वाक़ई क़ाबिले तारीफ है।

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कार्यक्रम विविध रंगी था, जिसमें अनूपजी के व्यक्त्तिव के विभिन्न पहलु उजागर हुए। कार्यक्रम का आरंभ रतिका जौहरी व रवि जैन द्वारा अनूपजी के गए भजनों की प्रस्तुति से हुआ। नीलांजना भट्टाचार्य व साक्षी ने अनूपजी की आवाज़ में गाए चतुरंग पर बहुत ही मनमोहक कत्थक नृत्य प्रस्तुत कर सबके दिल जीत लिए।

 

अनूपजी के जीवन व संगीत यात्रा पर राशी जौहरी ने दृष्य श्रव्य प्रस्तुति दी, जिसे आवाज़ दी अर्चना जौहरी ने।

 

वाजाल की अदालत में अनूपजी ने करुणा अग्रवाल, रेखा बब्बल, प्रमिला शर्मा, कविता गुप्ता, अर्चना जौहरी व अलका अग्रवाल की जूरी ने अनूपजी पर जितने इलज़ाम लगाये, अनूपजी ने सबके सटीक जवाब दिए।

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अंत में जज नुसरत खत्री ने उन्हें सारे आरोपों से बरी करते हुए कहा, “आप युगों-युगों तक गाते रहें और हम सुनते रहें।“ इस पर सारा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

 

इसके बाद सबकी प्रतीक्षा ख़त्म कर अनूपजी ने चंद भजन गाकर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन अर्चना जौहरी ने किया, जूरी का संचालन अलका अग्रवाल ने किया। वाजाल का परिचय संस्था की उपाध्यक्ष रेखा बब्बल ने दिया।

 

वाजाल की सदस्य चित्रा देसाई, सुषमा सेनगुप्ता, सुनीता शर्मा, नेहा वैद्य, नजमा मोब, रीता राम, संध्या गुप्ता, हीना पारेख आदि के सहयोग से आयोजन साकार हुआ।

 

इस अवसर पर विशिष्ट दर्शकों में वरिष्ठ गीतकार राजेश जौहरी व गीतकार अभिलाष, वरिष्ठ उद्घोषक किशन शर्मा, भवंस के ललित वर्मा व चंद्रकांत जोशी, मुंबी मित्र समाचार पत्र प्रकाशन के समूह संपादक अभिजीत राणे आदि उपस्थित थे।

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