उद्धरण

अलका अग्रवाल ने साहित्य संसार में अर्थपूर्ण लेखन का विस्तार किया है। वे मानती हैं कि “कला तो कला के लिए होती ही है, कला जीवन के लिए भी होती है।” यही फलसफा उनकी कहानियों और कविताओं में भी उधर कर आता है। वे आमजन, खासतौर पर महिलाओं के दर्द का चित्रण बखूबी करती हैं। उनके शब्दों से भाव उकेरने की क्षमता पर प्रख्यत लेखकों-साहित्यकारों व कई क्षेत्रों के दिग्गजों ने अलका पर टिप्पणियां की हैं, कुछ यहां पेश हैं:

 

“अलका के व्यंग्य की धार से बचना असंभव है। वह जो लिखती है, उसमें व्यंग्य तो होता है लेकिन समाज पर कटाक्ष करते हुए भी बहुत संयत रहती हैं।”

– पुष्पा भारती

 

“These stories are affiliated to life and express the bitter truths of life.”

“अलका की कहानियां जीवन के विभिन्न पहलुओं को बड़ी गहराई से छूती हैं।”

– Vishwnath Suchdev, Editor, Navneet

 

“These stories enlighten the life; have the seeds of future, pictures of stories of life.”

– Gyan Ranjan, Editor, Pahal

 

“अलका आम आदमी की लेखिका हैं। अलका की कहानी पढ़ कर लगता है कि यह हमारी कहानी है और उनकी कहानियां आस्था पैदा करती हैं।”

– धीरेंद्र अस्थाना, कथाकार

 

“Alka’s stories are the stories of different classes and genres, which draws the picture of various problems of deprived society with authenticity.”

“अलका का कहानी संग्रह 20 साल पहले आ जाना चाहिए था क्योंकि उनकी कहानियां अस्सी के दशक से ही छप रही हैं।”

– Sudha arora, Veteran Writer & Activist

 

“Natural flow of the stories of this collection is its strength. Facts and fiction are artistically woven in these stories.”

–  Surybala, Veteran Writer & Satirist

 

“Alka’s stories are the stories of relationship with deep touch of humanity.”

– Manoj Rupada, Veteran Writer & Novelist

 

“अनुभूति मेरी, अभिव्यक्ति तुम्हारी – मैं तो अलका के लिए यही कहूंगी। अलका आशु कवयित्री है, जो मैरे भाव होते हैं, उन्हें जस का तस कागज पर उकेर देती है।”

– पद्मश्री सोमा घोष, विख्यात शास्त्रीय गायिका

 

“अलका छोटी उम्र से ही स्त्री विमर्श की कहानियां लिखने लगी, तब तो यह विषय उठा ही नहीं था।”

– ओम भारती, कवि

 

“यदि अलका की भाषा और शैली यदि मेरे पास होती तो मैं हिंदुस्तान का सबसे बड़ा लेखक होता।”

– सुबोध श्रीवास्तव, कहानीकार एवं व्यंग्य लेखक

 

“अलका की कहानी मुर्दे इतिहास नहीं लिखते बहुतेरे कहानिकारों से आगे निकल जाती है क्योंकि इसमें मुंबई और बॉलीवुड का समांतर रूप से प्रकटन होता है।”

– पंकज बिष्ट, कहानीकार, उपन्यासकार, संपादक – समयांतर

 

“अलका की कहानियां बहुत अंदर तक छू जाती हैं।”

– सईद अंसारी, समाचार वाचक, आज तक

 

“अलका की कहानियां पंजाबी और हिंदी के कई कथाकारों की याद हो आती है, जो चरित्र चित्रण बहुत अच्छा करते हैं।”

– सुभाष नीरव, पंजाबी व हिंदी के प्रतिष्ठित उपन्यासकार व कथाकार

 

“अलका की कहानियां चलचित्र की तरह आखों के सामने तैरने लगती हैं और मन में पैठ जाती है।”

– अभिमन्यु, संपादक – दैनिक जागरण

 

“हिंदी में ऐसी कहानियों का स्वागत है। अलका की कथा शैली हमसे बातें करती सी लगती है।”

प्रताप सहगल, प्रख्यात कथाकार एवं अनुवादक